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Chapter -1

एक खूबसूरत मेंशन के एक कमरे में फोन की घंटी लगातार बज रही थी । वो बाथरूम से बाहर आई और जल्दी से फोन उठाया ।

दूसरी तरफ फोन पर एक लड़के ने  गुस्से चिल्लाते हए कहा "क्या कर रही थी इतनी देर से !मैं कब से कॉल के रहा हूं तुम्हे दिखाई नही दे रहा था ?

बेवकूफ कितनी बार कहा है एक में ही मेरा फोन उठाया करो तुम्हे समझ नही आती है क्या ? हमेशा मुझे गुस्सा दिलाती हो ।

वो धीरे से बोली "सॉरी....... मैं बाथरूम ......

"ओह ......जस्ट शट अप मुझे तुम्हारी कोई बकवास भरी बाते नही सुननी। एक घंटे में लेने आ रहा हूं। जल्दी तैयार हो जाओ !

"ले.....लेकिन इस वक्त .......  वो घड़ी में टाइम देखते हुए बोली जहां दस बज रहे थे ।

"प्लीज अब तुम अपनी फालतू की बकवास शुरू मात कर देना  मैने तुम्हारे पापा से बात कर ली है तो जल्दी से रेडी हो जाओ और हां अपनी वो ......  बहन जी वाले कपड़े मत पहन लेना । मेरे दोस्त वहां होंगे तो मैं नही चाहता की मेरी बेजात्ती हो ! एक काम करो कोई हॉट से ड्रेस पहन लेना समझ में आया ।

वो परेशान होकर  "प...पर मैं वैसे कपड़े नही पहनती ।

"बेबी सुनो मेरे लिए प्लीज और फिर मैं भी तो वहां रहूंगा ना, तुम्हारे साथ क्या तुम मेरे लिए इतना भी नही कर सकती ! ठीक है चलो मैं आता हूं बाय आई लव यू ....उसने फोन काट दिया ।

वो कुछ देर फोन को देखती रही उसके आंखो से आंसू उसके गालों पर लुढ़क गए । तभी कोई बाहर से दरवाजा खटखटाता है और वह जल्दी सेअपने आंसू साफ करके बोली "कौन है ?

दरवाजे पर उसकी मां सरोज थी "बेटा मैं.....! सो गई क्या ?

उसने खुद को ठीक किया और दरवाजा खोली "नहीं मां , बोलिए।

उसकी मां उसकी आंखों की नमी देख लेती है " बेटा वो अमित  का फोन आया था तुम्हारी बात हो गई ना ?

शायरी उनकी तरफ देखकर व्यंग से बोली  "जब आपसे बात हो गई है तो मुझसे क्या पूछ रही है आप ?

सरोज जी "बेटा वह तो तुम्हे पार्टी में ले जाना चाहता है तुम्हें तुम्हें भी अच्छा लगेगा बाहर जाकर ।

शायरी - आपको मुझे पूछना चाहिए था कि मैं जाना भी चाहती हूं या नहीं !

" बेटा पर यह तो कोई बड़ीबत नहीं हो मंगेतर है तुम्हारा !

 शायरी नाराजगी से "ठीक का जब मेरी सगाई से पहले नहीं पूछा आपने तो अब क्या ही पूछेंगी !

सरोज जी "बेटा तुम इस रिश्ते को जितना जल्दी अपना लोगी उतना ही अच्छा होगा तुम्हारे लिए वरना अपने पापा को तुम जानते ही हो !

शायरी अपने आंसू साफ करके " ठीक कहां अपने  मैं समझ गई अब आप बाहर जाइए मुझ मुझे रेडी होना  है ।

सरोज जी उसके सर पर हाथ फेर कर बाहर चली गई और वो अपने मन मे दुखी होकर बोली "माफ करना बेटा मैं कुछ नहीं कर पाई तेरे लिए !

शायरी अपने मन मार कर तैयर होने लगती है वह हमेशा से ही  सिंपल लड़की थी आज के जमाने में जहां सब कुछ बदल गया था  कपड़ा के पहनने तक सबकछ वही वो अपने सादगी में ही  खुश रहती थी 

वही अमित जो एक अमीर बाप की बिगड़े औलाद जिसे हर वक्त नशा ही पसंद था चाहे वह पैसा कहो शबाब या शराब । यह सब उसके शौक थे जिसे वह जब चाहे तब पूरा करता , उसके लिए खुद के अलावा कुछ जरूरी नहीं ना किसी के जज्बात या किसी के एहसास ।

शायरी  तैयार होकर बाहर आई उसने एक अनारकली कुर्ती पहनी हुई थी लंबी चोटी जिसे उसने एक साइड अपने कंधे परदल पर डाल रखा था  और मेकअप के नाम पर सिर्फ काजल लगाया हुआ था वो वह हॉल में आकर बैठ गई और अमित का इंतजार करने लगी ।

शायरी  बेहद खबसूरत लंबे बाल, काली गहरी आखें बड़ी-बड़ी पलके रंग ना ज्यादा गोरा ना ज्यादा कला । 5 फुट 5 इंच की  कुल मिलाकर बहुत खूबसूरत जिसे दिखावे करना पसंद नहीं ।

कुछ दर बाद

घर के बाहर एक कार रुकने की आवाज आई अमित आ चुका था और बाहर से हॉर्न दे रहा था तो शायरी बाहर आई ।

अमित  उसे बाहर आते  देख गुस्से से भर गया वो  जल्दी से गाड़ी से उतर उसके पास आया और गुस्से से "मैंने कहा था तुमसे !

शायरी डरते हुए "अ......अमित  मै......।

 अमित दांत पीसते हुए   "तुम अपनी यह बहन जी वाला लुक कभी नही छोड़ोगी ना तुम्हें एक बार में मेरी बात समझ में नही आती ?

फिर गुस्से से उसके बाजू पकड़ मेंशन के अदर ले गया और जोर से चिल्लाया "तुम्हें कितना भी बोल लो  तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता तुम इतनी बेवकूफ जो हो !

उसकी आवाज सुनकर शायरी मां और पापा बाहर आए । और रोहन को इतने गुस्से में देख सरोज जी उसके पास आकर बोली "क्या हुआ अमित बेटा तुम इतने गुस्से में क्यो हो ?

शायरी के पापा शशि जी एक नजर शायरी को  देखकर "क्या बात है अमित तुम इतने गुस्से में क्यों हो ?

 अमित गुस्से में "यह आप अपनी बेटी से ही पूछिए !

शशि  जी शायरी को देखते हुए "शायरी  क्या बात है ......तुमने  फिर से  कोई गलती की है क्या ?

 अपने पापा की बात को सुनकर शायरी की आंखो में  आंसू आ जाते है । वो अपना सर न में हिलती है ।

शशि जी गुस्से से तो फिर अमित  इतने गुस्से में क्यों है बिना बिना बात का तो नहीं होगा !

शायरी कुछ नहीं बोली बस उसे देखते रही ।

अमित "अंकल मैं बतता मैंने इसे कहा था की पार्टी में  जाना है तो कोई अच्छा पार्टी वियर कपड़े पहन ले लेकिन नहीं हमेशा की तरह बहन जी बन कर आ गई कम से कम मेरी इमेज का तो ख्याल रखती !

शशि गुस्से से शायरी " यह क्या तरीका है जब उसने कहा था तो तुमने उसकी बात क्यों नहीं मानी । 

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